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Khari Kitab
Pinjar (Hindi) / पिंजर: A Powerful Partition-Era Novel of Womanhood, Pain & Redemption / भारत विभाजन की त्रासदी और स्त्री अस्मिता का मार्मिक चित्रण
Pinjar (Hindi) / पिंजर: A Powerful Partition-Era Novel of Womanhood, Pain & Redemption / भारत विभाजन की त्रासदी और स्त्री अस्मिता का मार्मिक चित्रण
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पिंजर यानी कंकाल। न कोई आकृति, न सूरत, न मन, न मर्ज़ी, बस कंकाल। ‘पिंजर’ आज़ादी के दौर के भारत की कहानी है। उस हिस्से की, जो हिंदुस्तान से कटकर पाकिस्तान बना। पिंजर में स्त्री की पीड़ा है, वेदना है, संताप है, त्याग है और ममत्व है। साथ में मर्दों के अपराध हैं और पश्चात्ताप भी। हिंदू हैं, मुसलमान हैं। विभाजन का दंश है। धर्मांधता के विरुद्ध खड़े मानवीय मूल्य हैं, जिनके सहारे अंत में वर्तमान के यथार्थ को कुबूल कर उपन्यास की नायिका सबके गुनाह माफ करती है और फिर से जिंदा हो उठती है, भविष्य की अनंत संभावनाओं के साथ|
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